आदमी बुलबुला है पानी का
आदमी बुलबुला है पानी का,
और पानी की बहती सतह पर,
टूटता भी है, और डूबता भी है,
फिर उभरता है, फिर से बहता है,
न समंदर निगल सका इसको,
वक्त की मौज पर सदा बहता;
आदमी बुलबुला है पानी का!
-गुलज़ार
हम ने माना के तगाफ़ुल ना करोगे, लेकिन खाक हो जायेंगे हम तुमको खबर होने तक - मिर्जा गालिब
आदमी बुलबुला है पानी का,
और पानी की बहती सतह पर,
टूटता भी है, और डूबता भी है,
फिर उभरता है, फिर से बहता है,
न समंदर निगल सका इसको,
वक्त की मौज पर सदा बहता;
आदमी बुलबुला है पानी का!
-गुलज़ार
प्रस्तुतकर्ता
TwoFaces
पर
10:07 pm
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